जयपुर निकाय चुनाव में छाया ‘बंदरों का आतंक’, प्रत्याशियों के लिए बना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

जयपुर निकाय चुनाव में छाया 'बंदरों का आतंक', प्रत्याशियों के लिए बना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

जयपुर की सड़कों पर बंदरों का बढ़ता कहर

राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, इन दिनों एक अजीबोगरीब समस्या से जूझ रही है। आगामी निकाय चुनावों के बीच, शहर के विभिन्न वार्डों में बंदरों का आतंक एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है। स्थानीय निवासी पिछले कई महीनों से बंदरों के हमलों और उनके द्वारा की जा रही तोड़फोड़ से त्रस्त हैं, और अब उन्होंने इसे अपने वोट का आधार बनाने का निर्णय लिया है।

चुनाव में मुख्य मुद्दा: ‘नो मोर मंकी बिजनेस’

newskatta की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के परकोटे वाले इलाकों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक, बंदरों की बढ़ती संख्या ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रत्याशियों को अपने चुनाव प्रचार के दौरान जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। लोग अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो बंदरों के आतंक से स्थायी समाधान का वादा कर रहे हैं।

newskatta संवाददाता के अनुसार, स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंदरों के कारण बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और छतों पर रखे पानी की टंकियां व बिजली के तार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।

समस्या के समाधान की राह

  • नगर निगम द्वारा बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना।
  • शहर के बाहरी इलाकों में बंदरों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल (मंकी सफारी) का निर्माण।
  • धार्मिक स्थलों के आसपास बंदरों को खाना खिलाने पर नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान।
  • वन विभाग और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।

निकाय चुनाव के उम्मीदवार अब अपने घोषणापत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से शामिल कर रहे हैं। देखना यह होगा कि क्या नई निर्वाचित परिषद इस ‘मंकी मेनस’ से शहर को निजात दिला पाती है या यह समस्या केवल चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाएगी।

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